Vishalnath Mahadev Mandir, Hajipur

यह शिवमन्दिर बिहार राज्य के अन्तर्गत वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर में गंगा एवं गण्डक के संगम पर अवस्थित है।

कोनहारा घाट, अंदर किला

पटना-हाजीपुर सडक मार्ग पर महात्मा गाँधीसेतु पार करने के बाद रामचौरा होते हुए कोनहारा घाट तक जाने वे सड़क मार्ग से यहाँ जाया जा सकता है।

कोनहारा घाट पर गंगा एवं गण्डक का पवित्र संगम है, जहाँ सोन की धारा भी आ जाती है, फलतः इस कोनहारा घाट पर लाल रंग के पत्थर के टुकड़े भी मिलते हैं। इस प्रकार इस पवित्र संगम को हम त्रिवेणी संगम भी कह सकते हैं।

यहाँ विश्वकर्मा मन्दिर, नेपाली मन्दिर, बद्रीविशाल मन्दिर आदि अन्य प्रसिद्ध मन्दिर हैं।

कोनहारा घाट श्मशान घाट के रूप में अत्यन्त पवित्र माना जाता है। पर्मपरा के अनुसार इसी स्थान पर गज एवं ग्राह की लड़ाई हुई थी और भगवान् विष्णु अपने भक्त गज की रक्षा के लिए आये थे। कोनहारा शब्द की व्यत्पत्ति आज कौन हारा यानी गज एवं ग्राह के युद्ध में कौन हारा इसका निर्णय इसी स्थल पर हुआ था, ऐसा कहते हैं।

हलाँकि शब्द की व्युत्पत्ति के अनुसार कोणह्रद यानी दो नदियों के संगम पर बननेवाला तालाब कोनहारा बन गया। अध्यात्म रामायण के अनुसार राज्याभिषेक के बाद श्रीराम जब तीर्थयात्रा के क्रम में मिथिलापुरी आये थे तो उन्होंने इसी कोणह्रद में स्नान किया था तथा सुनहले कमलों के पूल से भगवान् शिव की आराधना की थी। माना जाता है कि वर्तमान में स्थापित शिवलिंग की पूजा कभी श्रीराम ने भी की थी।

इसी पवित्र स्थल पर लगभग 30 वर्ष पहले एक गुप्तकालीन शिवलिंग मिला था। जिनका स्थान सतह से लगभग 7 फीट नीचे था। 2004 ई. में महावीर मन्दिर, पटना के द्वारा यहाँ भव्य मन्दिर का निर्माण कराया गया तथा नया अरघा, नन्दी एवं शिव-परिवार की मूर्तियाँ स्थापित कर उस गुप्तकालीन शिवलिंग को प्रतिष्ठापित किया गया।

इसी परिसर में महावीर मन्दिर के द्वारा 32 कमरों का एक भवन का निर्माण भी कराया गया है।

इस महादेव मन्दिर में रुद्राभिषेक, मुण्डन आदि क्रमकाण्डों की भी व्यवस्था है। वहाँ एक पुजारी नियमित रूप से रहते हैं तथा आनेवाले तीर्थयात्रियों की सारी सुविधा का ध्यान  रखते हैं। बाहर से आनेवाले तीर्थयात्रियोंके लिए रात्रि में विश्राम की भी आवश्यकता है।

इस परिसर में महावीर मन्दिर के द्वारा विवाह-स्थल की भी व्यवस्था की गयी है।

इस स्थान से हाजीपुर बाजार की दूरी लगभग 1 कि.मी. है। करीब 500 मीटर की दूरी पर रेलवे कालोनी का भी हाल में निर्माण कराया गया है।

इस महादेव मन्दिर के ठीक पीछे गण्डक की धारा बहती है, जिसके घाट पर बैठकर मनमोहक दृश्य का दर्शन होता है। बगल में प्राचीन कबीर मठ भी दर्शनीय है।

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